पात्रा (मॉनसून स्पेशल)

#MS :— दोस्तों आज की टीम के लिए मैंने सभी की पसंद की पत्र बनाई है जिसे अलग-अलग क्षेत्र में अलग नाम से जाना जाता है जैसे महाराष्ट्र में अलूवडी़, गुजरात में पात्रा, उत्तर प्रदेश में पतोड़़ , मध्य प्रदेश में पातोडें और हमारे बिहार झारखंड में अरबी के पत्ते के पकौड़े । जी हां दोस्तों अलग-अलग नाम से जाने जाने वाला यह पतोड़ बरसात के मौसम में चार-चार लगा देते हैं। आयरन से भरपूर खून की कमी में फायदेमंद होता है । पाचन तंत्र को मजबूत करता है। विटामिन ए ,सी और कैल्शियम हड्डियों और त्वचा के लिए लाभदायक होती है। कम कैलोरी वाला होती है जिसके कारण वजन घटाने वालों के लिए भी बहुत ही अच्छी ऑप्शन है। शाम का वक्त था... आसमान कई दिनों से चुप था, मगर आज पहली बार वो बोल उठा — बूँदों की बोली में। जैसे ही पहली बारिश की फुहारें ज़मीन को चूमीं, मेरे आँगन में लगे अरबी के पत्ते झूम उठे।
उन पर गिरती बूँदें मोतियों की तरह चमक रही थीं —
छपक... छपक...
और जैसे वो पत्ते नहीं, पानी में तैरते कोई हरे मोती हों।
मैंने मुस्कुराकर सोचा — "बस, आज पतोड़ बनेगा!"
किचन में बेसन तैयार हुआ, मसाले घुले, और एक-एक पत्ते को प्यार से लपेटते हुए मैंने रोल बना दिए। भाप में पकाए, फिर स्लाइस काटकर गरम तेल में डाला तो छन्न से आवाज आई —
जैसे हर बूँद की ताल पर तवे ने तालियां बजा दी हों।
उधर बारिश की खुशबू मोहल्ले में फैली, इधर पतोड़ की!
और तभी दरवाज़े पर दस्तक...
"अरे नमस्ते भाभी!" — शर्मा जी अंदर आते ही बोले, "बारिश हो रही थी, चाय का मन कर गया... देखा इधर से खुशबू भी आ रही है..."
पीछे से हमारे हस्बैंड मुस्कुराते हुए बोले,
"बैठिए शर्मा जी, गरम पकौड़े तैयार हैं।"
फिर क्या — हमने टेबल पर चाय रखी, साथ में गरमागरम पतोड़।
शर्मा जी ने एक कौर लिया और जैसे ही मुँह में गया, बोले:
"भाभी! कसम से, ऐसा स्वाद तो बचपन में नानी के हाथों में ही खाया था!"
"ये तो कला है... खाना नहीं!"
बारिश की रिमझिम, गरम चाय की घूंट और पतोड़ की खुशबू —
ऐसा लगा जैसे कोई छोटा सा त्योहार हमारे घर ही आ बैठा हो।
उस दिन सिर्फ पकौड़े नहीं तले गए...
यादें तली गईं, हँसी तली गई, और मोहल्ला फिर से एक हो गया। दोस्तों मेरी छोटी सी कहानी को बहुत ही ध्यान पूर्वक पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद कहानी अच्छी लगी हो तो जरूर बताएं साथ में रेसिपी के बारे में भी अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियां जरूर दें।
पात्रा (मॉनसून स्पेशल)
#MS :— दोस्तों आज की टीम के लिए मैंने सभी की पसंद की पत्र बनाई है जिसे अलग-अलग क्षेत्र में अलग नाम से जाना जाता है जैसे महाराष्ट्र में अलूवडी़, गुजरात में पात्रा, उत्तर प्रदेश में पतोड़़ , मध्य प्रदेश में पातोडें और हमारे बिहार झारखंड में अरबी के पत्ते के पकौड़े । जी हां दोस्तों अलग-अलग नाम से जाने जाने वाला यह पतोड़ बरसात के मौसम में चार-चार लगा देते हैं। आयरन से भरपूर खून की कमी में फायदेमंद होता है । पाचन तंत्र को मजबूत करता है। विटामिन ए ,सी और कैल्शियम हड्डियों और त्वचा के लिए लाभदायक होती है। कम कैलोरी वाला होती है जिसके कारण वजन घटाने वालों के लिए भी बहुत ही अच्छी ऑप्शन है। शाम का वक्त था... आसमान कई दिनों से चुप था, मगर आज पहली बार वो बोल उठा — बूँदों की बोली में। जैसे ही पहली बारिश की फुहारें ज़मीन को चूमीं, मेरे आँगन में लगे अरबी के पत्ते झूम उठे।
उन पर गिरती बूँदें मोतियों की तरह चमक रही थीं —
छपक... छपक...
और जैसे वो पत्ते नहीं, पानी में तैरते कोई हरे मोती हों।
मैंने मुस्कुराकर सोचा — "बस, आज पतोड़ बनेगा!"
किचन में बेसन तैयार हुआ, मसाले घुले, और एक-एक पत्ते को प्यार से लपेटते हुए मैंने रोल बना दिए। भाप में पकाए, फिर स्लाइस काटकर गरम तेल में डाला तो छन्न से आवाज आई —
जैसे हर बूँद की ताल पर तवे ने तालियां बजा दी हों।
उधर बारिश की खुशबू मोहल्ले में फैली, इधर पतोड़ की!
और तभी दरवाज़े पर दस्तक...
"अरे नमस्ते भाभी!" — शर्मा जी अंदर आते ही बोले, "बारिश हो रही थी, चाय का मन कर गया... देखा इधर से खुशबू भी आ रही है..."
पीछे से हमारे हस्बैंड मुस्कुराते हुए बोले,
"बैठिए शर्मा जी, गरम पकौड़े तैयार हैं।"
फिर क्या — हमने टेबल पर चाय रखी, साथ में गरमागरम पतोड़।
शर्मा जी ने एक कौर लिया और जैसे ही मुँह में गया, बोले:
"भाभी! कसम से, ऐसा स्वाद तो बचपन में नानी के हाथों में ही खाया था!"
"ये तो कला है... खाना नहीं!"
बारिश की रिमझिम, गरम चाय की घूंट और पतोड़ की खुशबू —
ऐसा लगा जैसे कोई छोटा सा त्योहार हमारे घर ही आ बैठा हो।
उस दिन सिर्फ पकौड़े नहीं तले गए...
यादें तली गईं, हँसी तली गई, और मोहल्ला फिर से एक हो गया। दोस्तों मेरी छोटी सी कहानी को बहुत ही ध्यान पूर्वक पढ़ने के लिए दिल से धन्यवाद कहानी अच्छी लगी हो तो जरूर बताएं साथ में रेसिपी के बारे में भी अपनी महत्वपूर्ण टिप्पणियां जरूर दें।
कुकिंग निर्देश
- 1
अरबी के पत्तों को धोकर सूखा ले। डंठल हटाकर पतला काट ले। एक पत्ता ले उसे पर बेसन का लेप लगाए,फिर दूसरा पत्ता रखकर लिप करें 4 से 5 पत्ते ऐसे रखकर रोल बना ले। अब इस रोल को 15 से 20 मिनट के लिए स्टीम करें।
- 2
ठंडा होने पर गोल टुकड़ों में काट ले।
- 3
कटे हुए टुकड़ों को तेल में क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें। चाहे तो तेल डालकर हल्का तड़का भी लगा सकते हैं। इसे हरी चटनी मीठी चटनी या दही के साथ खाएं।
- 4
मुझे माफ कीजिएगा मैं यहां पर प्रेजेंटेशन इसके सही नहीं कर पाई क्योंकि यह तलने के बाद बहुत मुश्किल से मैंने यह तस्वीर ली है साझा करने के लिए ।
शीर्ष पर खोजें
समान रेसिपी
और रेसिपीज़















कमैंट्स (18)