मसूर की दाल की तीसी वाली कचरी

 Chef Richa pathak.
Chef Richa pathak. @cook_22770864
Aurangabad

दोस्तों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हस्तकारी के क्षेत्र में हमारे देश की महिलाओं को कोई हरा नहीं सकता। तरह-तरह की अपने हाथों से दाल से बनी अनेकों भेराइटी घर से लेकर बाजार तक अपनी छाप छोड़ी है। जी हां दोस्तों मैं गर्मियों में खास तौर पर बनाई जाने वाली पारंपरिक खाद्य पदार्थों के बारे में कहना चाह रही हूँ जो सादी-विवाह के मौके पर लगन की बडिया तो कहीं कुमार पत के नाम से परिभाषित किया है। गर्मी के मौसम में पछिया पवन के साथ,कोयल की मीठी स्वर,एक साथ सभी के छतों पर दो से तीन महिलाओं का एकत्रित होना इस बात का प्रमाण है कि पुरानी परंपरा ने आज की पीढ़ी के अंदर अपनी स्थान कायम रखने मे सफल रही है। पहले के जमाने में अभाव में बनाई गई बडिया आज फैशन बन गया है। गांव हो या शहर सभी जगह पर बनाई जाने वाली पारंपरिक सालों तक स्टोर करके रखने वाले यह पदार्थ,सिर्फ पदार्थ ही नहीं बल्कि माँ,नानी,दादी का स्नेह और प्यार जताने की प्रतिक्रिया हैं। अम्मा हमौ बासते तनी बना डालियो बडी,बिटिया से मिल आए। काकी जरा भतुवा वाली बडी बना देना कुछ अलग खाने की इच्छा हो रही है। ओ भाभी गर्मी की छुट्टियाँ होने वाली है,अलसी की कचरी बना देना। अथार्त कहने का तात्पर्य यह है कि इसने समूचे रिश्ते को अपनी अमूल्य रूप होते हुए भी मूल्यवान बना दिया। दूर देश में रह रहे बेटे के लिए माँ का प्यार भरा यादगार हैं। दोस्तों आज मैंने भी उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अलसी (तीसी)से मंसुर की दाल में मिला कर कचरी बनाई हैं जो पेट में ठंडी बनाए रखने में मदद करती है और स्वादिष्ट होती हैं।

मसूर की दाल की तीसी वाली कचरी

दोस्तों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हस्तकारी के क्षेत्र में हमारे देश की महिलाओं को कोई हरा नहीं सकता। तरह-तरह की अपने हाथों से दाल से बनी अनेकों भेराइटी घर से लेकर बाजार तक अपनी छाप छोड़ी है। जी हां दोस्तों मैं गर्मियों में खास तौर पर बनाई जाने वाली पारंपरिक खाद्य पदार्थों के बारे में कहना चाह रही हूँ जो सादी-विवाह के मौके पर लगन की बडिया तो कहीं कुमार पत के नाम से परिभाषित किया है। गर्मी के मौसम में पछिया पवन के साथ,कोयल की मीठी स्वर,एक साथ सभी के छतों पर दो से तीन महिलाओं का एकत्रित होना इस बात का प्रमाण है कि पुरानी परंपरा ने आज की पीढ़ी के अंदर अपनी स्थान कायम रखने मे सफल रही है। पहले के जमाने में अभाव में बनाई गई बडिया आज फैशन बन गया है। गांव हो या शहर सभी जगह पर बनाई जाने वाली पारंपरिक सालों तक स्टोर करके रखने वाले यह पदार्थ,सिर्फ पदार्थ ही नहीं बल्कि माँ,नानी,दादी का स्नेह और प्यार जताने की प्रतिक्रिया हैं। अम्मा हमौ बासते तनी बना डालियो बडी,बिटिया से मिल आए। काकी जरा भतुवा वाली बडी बना देना कुछ अलग खाने की इच्छा हो रही है। ओ भाभी गर्मी की छुट्टियाँ होने वाली है,अलसी की कचरी बना देना। अथार्त कहने का तात्पर्य यह है कि इसने समूचे रिश्ते को अपनी अमूल्य रूप होते हुए भी मूल्यवान बना दिया। दूर देश में रह रहे बेटे के लिए माँ का प्यार भरा यादगार हैं। दोस्तों आज मैंने भी उस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अलसी (तीसी)से मंसुर की दाल में मिला कर कचरी बनाई हैं जो पेट में ठंडी बनाए रखने में मदद करती है और स्वादिष्ट होती हैं।

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सामग्री

2से तीन दिन
×××××
  1. 1 किलोमंसुर की दाल भिगोए हुए
  2. आवस्यकता अनुसार अलसी
  3. 2-3 चम्मचलाल मिर्च पाउडर
  4. 2-3 चम्मचअजवायन और मंगरैला
  5. नमक स्वादानुसार

कुकिंग निर्देश

2से तीन दिन
  1. 1

    सबसे पहले मंसुर की दाल को अच्छी तरह से धो कर फूलने के लिए पानी में डाल दे फिर मिक्सी के जार में बिना पानी का मुलायम पीस लें।

  2. 2

    अब एक ही दिशा में फेट लें जब तक कि इसका रंग हल्की चमकदार ना हो जाए। अब अलसी को धो कर डाल दें और मिला लें। अब नमक,अजवायन और मंगरैला डाल कर मिला ले।

  3. 3

    अब सूती वस्त्र पर धुप में छोटी-छोटी अंगुलियों पर रख कर अंगूठे से गिरा लें। अच्छी तरह से धूप में सूखने के बाद यह खुद से निकल आती हैं। अब सभी को निकाल ले और दो से तीन दिन धूप में सुखा ले और काँच की बरनी में सालों भर के लिए स्टोर करें। अब इसे भुनने के लिए कराही में सरसों का तेल गर्म करें और मीडियम फलेम में भुने।

  4. 4

    बराबर से भुन जाने के बाद यह ऐसी दिखने लगे गी। अब इसे चावल-दाल के साथ गरमा गरम सर्व करें ।

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कैमरा का एक हैंडमेड कार्टून और तवे से उभरते हुए सितारों के साथ एक फ्राइंग पैन है
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